सोलन: नौणी विश्वविद्यालय के फसल कीट जैविक नियंत्रण केंद्र को मिला सर्वश्रेष्ठ केंद्र पुरस्कार - सत्यमेव जयते

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Friday, June 20, 2025

सोलन: नौणी विश्वविद्यालय के फसल कीट जैविक नियंत्रण केंद्र को मिला सर्वश्रेष्ठ केंद्र पुरस्कार


सोलन। डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी ने फसल कीटों के जैविक नियंत्रण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय के अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (ए.आई.सी.आर.पी.) फसल कीटों के जैविक नियंत्रण केंद्र को वर्ष 2024-25 के लिए सर्वश्रेष्ठ केंद्र का पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

यह सम्मान असम कृषि विश्वविद्यालय, जोरहाट में आयोजित ए.आई.सी.आर.पी. की वार्षिक बैठक में प्रदान किया गया। पुरस्कार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की सहायक महानिदेशक (पौधा संरक्षण एवं जैव सुरक्षा) डॉ. पूनम जसरोटिया और आईसीएआर-एन.बी.ए.आई.आर., बेंगलुरु के निदेशक डॉ. एस.एन. सुशील ने प्रदान किया। समारोह में असम कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिद्युत चंदन डेका और देश भर के 70 से अधिक वैज्ञानिक उपस्थित थे, जबकि आईसीएआर के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी.के. यादव वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।

केंद्र के प्रधान अन्वेषक डॉ. सुभाष चंद्र वर्मा ने बताया कि 1985 से संचालित यह केंद्र जैविक कीट और रोग प्रबंधन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। आधुनिक सुविधाओं से लैस यह केंद्र फलों और सब्जियों में कीटों के प्रबंधन के लिए मित्र कीटों, परजीवियों और सूक्ष्मजीवी एजेंटों का उपयोग करता है। केंद्र ने अंडा परजीवी की पांच प्रजातियों, माइट और ऐथोकोरिड बग को प्रयोगशाला में संरक्षित किया है, जिसका उपयोग रसायनों पर निर्भरता कम करने के लिए किया जाता है।

केंद्र ने हिमाचल प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों, जैसे भरमौर और स्पीति, में पर्यावरण-अनुकूल कीट प्रबंधन पर चार प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए। साथ ही, इसके कई शोध पत्र प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने डॉ. सुभाष चंद्र वर्मा, डॉ. विश्व गौरव सिंह चंदेल और डॉ. नरेंद्र भरत की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह पुरस्कार टिकाऊ कृषि और वैज्ञानिक उत्कृष्टता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। अनुसंधान निदेशक डॉ. संजीव चौहान सहित विश्वविद्यालय के सभी अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने भी इस उपलब्धि पर बधाई दी।

यह पुरस्कार नौणी विश्वविद्यालय के पर्यावरण-अनुकूल कृषि अनुसंधान और सामुदायिक सहभागिता के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाता है।

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